उत्तर प्रदेश सरकार ने Microsoft, Intel और Google के साथ मिलकर ‘Vision 2047’ के तहत हर महीने 10 लाख लोगों को AI, ML, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी में ट्रेनिंग देने की योजना शुरू की है। यह पहल युवाओं को डिजिटल स्किल्स से लैस करेगी, जिससे नौकरी के अवसर बढ़ेंगे। लखनऊ में भारत का पहला AI सिटी भी बन रहा है।
यूपी के युवाओं को डिजिटल भविष्य के लिए तैयार करती नई IT पहल
उत्तर प्रदेश सरकार ने तकनीकी क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। ‘Vision 2047’ कार्यक्रम के तहत, सरकार ने Microsoft, Intel और Google जैसे दिग्गज टेक कंपनियों के साथ साझेदारी की है। इस पहल का लक्ष्य हर महीने 10 लाख लोगों, विशेष रूप से युवाओं, शिक्षकों और किसानों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना है। यह योजना डिजिटल भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इसके तहत, लखनऊ के पास भारत का पहला AI सिटी विकसित किया जा रहा है, जिसमें 10,700 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह शहर न केवल तकनीकी नवाचार का केंद्र होगा, बल्कि यह युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। सरकार का दावा है कि यह प्रोजेक्ट डिजिटल स्किल्स को बढ़ावा देकर उत्तर प्रदेश को तकनीकी हब के रूप में स्थापित करेगा।
ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का ढांचा
ये ट्रेनिंग प्रोग्राम्स विशेष रूप से युवाओं को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए हैं। इनमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के कोर्स शामिल होंगे, जो विभिन्न स्तरों के लिए उपयुक्त होंगे। बेसिक डिजिटल स्किल्स से लेकर एडवांस्ड AI और साइबर सिक्योरिटी तक के कोर्स उपलब्ध होंगे। Microsoft और Intel जैसे ब्रांड्स द्वारा प्रदान की जाने वाली ट्रेनिंग में प्रोग्रामिंग, डेटा साइंस, और एल्गोरिदम डेवलपमेंट जैसे विषय शामिल होंगे। Google डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग पर विशेष जोर देगा।
इन कोर्सेस का उद्देश्य युवाओं को ग्लोबल जॉब मार्केट के लिए तैयार करना है। उदाहरण के लिए, साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग में डेटा प्राइवेसी, हैकिंग प्रिवेंशन और नेटवर्क सिक्योरिटी जैसे टॉपिक्स शामिल होंगे, जो आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि ये कोर्स ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं के लिए सुलभ हों।
AI सिटी: एक नया क्षितिज
लखनऊ के पास प्रस्तावित AI सिटी तकनीकी नवाचार का एक अनूठा मॉडल होगा। यह न केवल ट्रेनिंग का केंद्र होगा, बल्कि स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों के लिए एक हब भी बनेगा। इस प्रोजेक्ट से हजारों नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है, जिससे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह सिटी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी और भारत को AI के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाने में मदद करेगी।
युवाओं के लिए अवसर
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था में हिस्सा लेने के लिए सशक्त बनाएगी। विशेष रूप से उन युवाओं के लिए, जो बेरोजगारी या कम स्किल्स की समस्या से जूझ रहे हैं, यह प्रोग्राम एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। ट्रेनिंग पूरी करने वाले युवाओं को Microsoft, Google और Intel जैसे ब्रांड्स से सर्टिफिकेशन मिलेगा, जो उनकी नौकरी की संभावनाओं को और बढ़ाएगा।
चुनौतियां और समाधान
हालांकि, इस योजना को लागू करने में कुछ चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल डिवाइस की कमी एक बड़ी बाधा हो सकती है। सरकार ने इसके लिए BharatNet प्रोजेक्ट के तहत हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ाने का वादा किया है। साथ ही, ट्रेनिंग सेंटर्स को ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थापित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें।
विशेषज्ञों की राय
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश को डिजिटल युग में अग्रणी बनाएगी। एक विशेषज्ञ ने कहा, “AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में ट्रेनिंग न केवल नौकरी के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगी।” हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि ट्रेनिंग की गुणवत्ता और इसके बाद रोजगार के अवसरों को सुनिश्चित करना इस योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
Disclaimer: यह लेख समाचार, सोशल मीडिया पोस्ट्स और उपलब्ध वेब जानकारी पर आधारित है। जानकारी की सटीकता के लिए संबंधित सरकारी और कंपनी स्रोतों से पुष्टि करें।